बुधवार, 8 मई 2024

शिष्टाचार

शिष्टाचार
किसी के साथ सभ्यता पूर्ण आचरण करने को शिष्टाचार कहते हैं।

किसी से कुछ मांगते समय (कोई वस्तु या सहायता) अथवा अनुरोध करने के लिए “कृपया”शब्द का प्रयोग करते हैं।

जैसे — 
★ कृपया जलं ददातु।
★ कृपया आसन्दे उपविशतु।

यदि हमें कोई व्यक्ति कोई वस्तु दे अथवा सहायता करें और हम उसके अनुरोध को स्वीकार कर लें तो उस उपकार के लिए हमें “धन्यवादाः”कहना चाहिए।

“धन्यवादाः” के उत्तर में हमें “स्वागतम्” कहना चाहिए।

जैसे — 
प्रथम व्यक्ति – कृपया उपविशतु।
द्वितीय व्यक्ति –धन्यवादाः 
प्रथम व्यक्ति – स्वागतम्

“स्वागतम् ”का प्रयोग किसी को किसी भी प्रकार के कार्यक्रम में स्वागत करने के लिए करते हैं। 

जैसे – 
★ अस्मिन् वर्गे भवतां सर्वेषां हार्दं स्वागतम्। 
★ अस्मिन् कार्यक्रमे प्रधानमन्त्रिणः स्वागतम्।

जाने अनजाने में किसी भी प्रकार का कोई त्रुटि या भूल हो जाए तो “क्षम्यताम्” का प्रयोग करना चाहिए।
और जब हमसे कोई क्षमा याचना करें या “क्षम्यताम् ”कहे तो हमें “चिन्ता मास्तु ”अथवा “अस्तु - अस्तु” कहना चाहिए।

किसी को शुभकामना देने के लिए “ शुभाशयाः अथवा शुभेच्छा: ऐसा कहना चाहिए।

पारितोषिक देते समय अथवा परीक्षा में उत्तीर्ण हुए को “अभिनन्दनानि” कहना चाहिए।

किसी के कार्य की प्रशंसा करने के लिए साधु-साधु/समीचीनं/उत्तमम् कहना चाहिए।

सोमवार, 11 जुलाई 2022

hi du kya kre

hi du kya kre
🙏🏻 *गाँठ बांध लो !*🚩
*🪢 कन्याओं का विवाह 21वें वर्ष में, और लड़कों का विवाह 24वें वर्ष की आयु तक हर स्थिति में हो जाना चाहिए !*
*🪢 फ्लैट भूलकर मत खरीदना ! जमीन खरीदो, और उस पर Independent मकान बनाओ! वरना आपकी संतानों का भविष्य पिंजरे के पंछी की तरह हो जाएगा*
*🪢 नयी युवा पीढ़ी को कम से कम तीन संतानों को जन्म देने के लिए प्रेरित करें !*
*🪢 गांव से नाता जोड़ कर रखें ! और गांव की पैतृक सम्पत्ति, और वहां के लोगों से नाता, जोड़कर रखें !*
*🪢 अपनी संतानों को अपने धर्म की शिक्षा अवश्य दें, और उनके मानसिक व शारीरिक विकास पर अवश्य ध्यान दें !*
*🪢 हिन्दी भाषा (व क्षैत्रीय बोली का भी) का अधिक से अधिक प्रयोग करें, और प्रचार-प्रसार करें !*
*🪢 किसी भी जिहादी और आतंकवादी प्रवृत्ति के व्यक्ति से सामान लेने-देने, व्यवहार करने से बचें !*
*🪢 घर में बागवानी करने की आदत डालें,*(और यदि पर्याप्त जगह है,तो देशी गाय पालें!)
 *🪢 हर हिन्दू के घर वाल्मीकि रामायण, योग वशिष्ठ, भागवत गीता-वेद-उपनिषद होने चाहिए, जब होंगे तो पढ़ेंगे भी !*
*🔖 होली, दीपावली, दशहरा, नवरात्रि, मकर संक्रांति, जन्माष्टमी, राम नवमी, आदि जितने भी हिन्दू त्यौहार आयें, उन्हें आफिस/कार्य से छुट्टी लेकर सपरिवार मनायें! सामूहिक यज्ञ करें !*
*🪢 अपनी संतानों को प्रत्येक वर्ष एक विद्या प्रदान करें ! जैसे संगीत विद्या, योग विद्या, तैराकी, भोजन बनाने की विद्या, खेलकूद और युद्ध विद्या आदि,..... यानि अपनी संतानों को सशक्त बनाने में व्यस्त रखें !*
*🪢 वर्ष में कम से कम दो पैदल तीर्थ यात्रायें अवश्य करें !*
*🪢 प्रात: काल 5 बजे उठ जाएं, और रात्रि को 9 बजे तक सोने का नियम बनाएं !*
*🪢 यदि आपकी कोई एक संतान पढ़ाई में असक्षम है, तो उसको कोई भी हुनर (Skill) वाला ज्ञान जरूर दें !*
*🪢 आपकी प्रत्येक संतान को कम से कम तीन फोन नंबर स्मरण होने चाहिए, और आपको भी!*
*🪢 जब भी परिवार व समाज के किसी कार्यक्रम में जाएं, तो अपनी संतानों को भी ले जाएं ! इससे उनका मानसिक विकास सशक्त होगा !*
*🪢 परिवार के साथ मिल बैठकर भोजन करने का प्रयास करें, और भोजन करते समय मोबाइल फोन और टीवी बंद कर लें !*
*🪢 अपनी संतानों को बालीवुड की कचरा फिल्मों से बचाएं, और प्रेरणादायक फिल्में दिखाएं !*
*🪢 जंक फूड और फास्ट फूड से बचें !*
*🪢 सांयकाल के समय 10 मिनट भक्ति संगीत सुने, बजाएं !*
*🪢 दिखावे के चक्कर में पड़कर, व्यर्थ का खर्चा न करें !*
*🪢 दो किलोमीटर तक जाना हो, तो पैदल जाएं, या साईकिल का प्रयोग करें !*
*🪢 अपनी संतानों के मन में किसी भी प्रकार के नशे (गुटखा, तंबाखू, बीड़ी, सिगरेट, दारू...) के विरुद्ध चेतना उत्पन्न करें,तथा उसे विकसित करें !*
*🪢 सदैव सात्विक भोजन ग्रहण करें, अपने भोजन का ईश्वर को भोग लगा कर प्रसाद ग्रहण करें ! भोग में तुलसीदल जी को अवश्य सम्मिलित करें !*
*🪢 अपने आंगन में तुलसी का पौधा अवश्य लगायें, व नित्य प्रति दिन पूजा, दीपदान अवश्य करें !*
*🪢 अपने घर पर एक हथियार अवश्य रखें, ओर उसे चलाने का निरन्तर हवा में अकेले प्रयास करते रहें, ताकि विपत्ति के समय प्रयोग कर सकें ! जैसे-लाठी,हॉकी,गुप्ती, तलवार,भाला,त्रिशूल व बंदूक/पिस्तौल लाइसेंस के साथ !*
*🪢 घर में पुत्र का जन्म हो या कन्या का, खुशी बराबरी से मनाएँ ! दोनों जरूरी है ! अगर बेटियाँ नहीं होगी तो परिवार व समाज को आगे बढाने वाली बहुएँ कहाँ से आएगी और बेटे नहीं होंगे तो परिवार समाज व देश की रक्षा कौन करेगा !*
🙏 *जय श्री राम जी*🙏🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩राहुल

शुक्रवार, 6 मई 2022

bhraat bibhajan

bhraat bibhajan
भीष्म नहीं चाहते थे,
परिवार का बिखराव ।
कृष्ण नहीं चाहते थे,
एक युग की समाप्ति ।
धृतराष्ट्र नहीं चाहते थे,
राज-पतन।
द्रौपदी नहीं चाहती थी-
चीर हरण।

इसके बावजूद ,
वह सब हुआ
जो नहीं होना था ।

आज हमारा न चाहना,
हमारी चुप्पी में
चाहने की स्वीकृति ही तो है । [1]

इस देश की यही कहानी है , हम सब गलत बात का विरोध करने की बजाय, चुप्पी साधना बेहतर समझते है। प्रखर विरोध का साहस ही नहीं कर पाते और देश के कर्ताधर्ता उस मौन को सहमति मान अपनी मनमर्जी कर लेते है।

बंटवारे का भी यही किस्सा है, जिन्हे अलग देश चाहिए वे बहुत मुखर थे , बहुसंख्यक जो किसी तरह का कोई बंटवारा नहीं चाहते थे , चुप्पी साध कर घर बैठ गए। इसीलिए प्रश्न यह है कि क्या मातृभूमि का यह भाग रक्षा करने के लायक नहीं था या फिर हम में मातृभूमि की रक्षा के लिए मरमिटने का जज्बा नहीं था?

लोकतंत्र की दुहाई देने वाले नेताओ ने अपने फैसले पर एक आदर्शवाद का मुलम्मा चढ़ा कर , बहुसंख्यक वर्ग से बंटवारा होना चाहिए या नहीं, इस बारे उसकी इच्छा जानने का प्रयास ही नहीं किया। वहीं दूसरी और ९०% से ज्यादा अल्पसंख्यक वर्ग के लोगो ने मुस्लिम लीग को वोट देकर अलग राष्ट्र की हामी भर दी थी।

मगर जो चीज़ समझ से परे है वह थी गाँधी और नेहरू का इस बंटवारे का प्रखर विरोध न करना, धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देनेवाले ये नेता जिन्ना का खुलकर विरोध करने से परहेज करते रहे, अपने इस सिद्धांत की खातिर किसी भी तरह की क़ुरबानी देने से हिचकते रहे।

गाँधी भले यह कहते रहे कि विभाजन मेरी लाश पर होगा , मगर अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के चलते भीष्म की तरह वे भी राजा की हाँ में हाँ मिलाते रहे। भीष्म की तरह उन्होंने भी इसे एक सैद्धांतिक जामा पहनाने का प्रयास ही किया था। फिर कई अन्य जो विभाजन का विरोध तो करते थे मगर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने का जज्बा नहीं रखते थे।

जिन्हे अलग देश चाहिए था वे मरने मारने पर तुले हुए थे और जिन पर देश बचाने की जिम्मेदारी थी वे आदर्शवाद का लबादा ओढ़कर बैठे थे।



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फिर भी इस विषय पर बात करने पर सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम लोग जो कुछ भी कहेंगे वह अर्ध्य सत्य ही होगा, सत्य से कौसो दूर होगा क्योकि हम और आप सिर्फ उतना ही जानते है जितना देश के कर्ता-धर्ताओ ने हमें बताया है। इसीलिए गलत सही कि बजाय यह जानना बेहतर होगा कि क्या कोई अन्य विकल्प देश के सामने थे , क्या हम विभाजन टाल सकते थे या त्रासदी को कम कर सकते थे?

इसीलिए प्रश्न यह नहीं है कि बंटवारा गलत था या सही , प्रश्न यह है कि

क्या विभाजन टाला जा सकता था और क्या हमने विभाजन टालने के भरसक प्रयास किये थे ? यदि भारत अविभाजित रहता तो देश को कौन सी परेशानियों का सामना करना पड़ता?
क्या विभाजित हिस्सा सिर्फ जमीं का एक टुकड़ा था और अगर नहीं तो, राष्ट्र की एकता के लिए जो कीमत अदा की जाती, क्या वह मातृभूमि की अखंडता और सम्मान के हिसाब से बहुत ज्यादा होती?
तत्कालीन नेतृत्व ने क्यों ब्लैकमेलिंग के आगे हथियार डाल दिए थे? या बंटवारे स्वीकारने के पीछे कोई और कारण भी था?
वे कौन से कारण थे जिनके चलते, कांग्रेस ने मुस्लिम वर्ग का विश्वास खो दिया था , धर्मनिरपेक्षता की असफलता या सम्प्रदायवाद ? क्या यह संभव था कि यदि कांग्रेस कुछ त्याग करती तो मुस्लिम समाज का विश्वास फिर से जीत सकती थी?
जब देवबंद जैसे कई मुस्लिम संगठन और अब्दुल गफ्फार खान[3] जैसे बड़े मुस्लिम नेता भी बंटवारे के खिलाफ थे तो फिर सिर्फ जिन्ना और मुस्लिम लीग को क्यों मुस्लिम समाज का नुमाइंदा मान लिया गया?
जो लोग विभाजन के प्रखर विरोधी थे, क्या उनके मत को भी सुनने का प्रयास किया गया था या सिर्फ चंद लोगो ने विभाजन को मानने का फैसला कर लिया था?
डायरेक्ट एक्शन डे की विभीषिका देखने के बाद भी तत्कालीन नेतृत्व विभाजन के संभावित खौफनाक मंज़र से क्यों अनजान था? नरसंहार रोकने के समुचित उपाय क्यों नहीं किये गए या तत्कालीन नेतृत्व नरसंहार रोकने में असमर्थ था ?
पाकिस्तान में फंसे हिन्दुओ को बचाने के कोई गंभीर प्रयास क्यों नहीं किये गए ?
क्या इस विभाजन को लागु करने का कोई भी ऐसा तरीका नहीं था जिससे लाखो लोगो की जान बचाई जा सकती थी?
ये वे प्रश्न है जिनके जवाब हमें सोचने को मजबूर करेंगे कि विभाजन की त्रासदी किसकी विफलता का परिणाम था?

विभाजन के इतने साल यह जानना ज्यादा जरुरी है कि हम कहाँ गलत हुए और अगर भविष्य में ऐसे हालात फिर से पैदा हुए तो क्या यह राष्ट्र अपनी पुरानी गलतियों से कुछ सीख पाया है?

क्या हम भविष्य में होने वाली ऐसी किसी भी आपदा से निबटने के लिए तैयार है? या हम सिर्फ किताबी खानापूर्ति करने में विश्वास रखते है?

सोमवार, 27 दिसंबर 2021

उद्धव ने कृष्ण से पूछा

उद्धव ने कृष्ण से पूछा
उद्धव ने कृष्ण से पूछा,
जब द्रौपदी लगभग अपना शील खो रही थी,
तब आपने उसे वस्त्र देकर द्रौपदी के शील को बचाने का दावा किया!

लेकिन आप यह यह दावा भी कैसे कर सकते हैं ?

उसे एक आदमी घसीटकर भरी सभा में लाता है,
और इतने सारे लोगों के सामने निर्वस्त्र करने के लिए छोड़ देता है!

एक स्त्री का शील क्या बचा ? आपने क्या बचाया ?

क्या यही धर्म है ?"

ये अकेले उद्धव के प्रश्न नहीं हैं। महाभारत पढ़ते समय हर एक के मनोमस्तिष्क में ये सवाल उठते हैं!

उद्धव ने हम लोगों की ओर से ही श्रीकृष्ण से उक्त प्रश्न किए।

भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराते हुए बोले-
"प्रिय उद्धव, यह सृष्टि का नियम है कि विवेकवान ही जीतता है।

उस समय दुर्योधन के पास विवेक था, धर्मराज के पास नहीं।

यही कारण रहा कि धर्मराज पराजित हुए।"

उद्धव को हैरान परेशान देखकर कृष्ण आगे बोले- "दुर्योधन के पास जुआ खेलने के लिए पैसाऔर धन तो बहुत था, लेकिन उसे पासों का खेल खेलना नहीं आता था, इसलिए उसने अपने मामा शकुनि का द्यूतक्रीड़ा के लिए उपयोग किया। यही विवेक है। धर्मराज भी इसी प्रकार सोच सकते थे और अपने चचेरे भाई से पेशकश कर सकते थे कि उनकी तरफ से मैं खेलूँगा।

जरा विचार करो कि अगर शकुनी और मैं खेलते तो कौन जीतता ?

पाँसे के अंक उसके अनुसार आते या मेरे अनुसार?

चलो इस बात को जाने दो। उन्होंने मुझे खेल में शामिल नहीं किया, इस बात के लिए उन्हें माफ़ किया जा सकता है। 

लेकिन उन्होंने विवेक-शून्यता से एक और बड़ी गलती की! और वह यह- उन्होंने मुझसे प्रार्थना की कि मैं तब तक सभा-कक्ष में न आऊँ, जब तक कि मुझे बुलाया न जाए!

क्योंकि वे अपने दुर्भाग्य से खेल मुझसे छुपकर खेलना चाहते थे।

वे नहीं चाहते थे, मुझे मालूम पड़े कि वे जुआ खेल रहे हैं!

इस प्रकार उन्होंने मुझे अपनी प्रार्थना से बाँध दिया! मुझे सभा-कक्ष में आने की अनुमति नहीं थी!

इसके बाद भी मैं कक्ष के बाहर इंतज़ार कर रहा था कि कब कोई मुझे बुलाता है! भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव सब मुझे भूल गए! बस अपने भाग्य और दुर्योधन को कोसते रहे! 

अपने भाई के आदेश पर जब दुःशासन द्रौपदी को बाल पकड़कर घसीटता हुआ सभा-कक्ष में लाया, द्रौपदी अपनी सामर्थ्य के अनुसार जूझती रही!

तब भी उसने मुझे नहीं पुकारा!
उसकी बुद्धि तब जागृत हुई, जब दुःशासन ने उसे निर्वस्त्र करना प्रारंभ किया!

जब उसने स्वयं पर निर्भरता छोड़कर-
'हरि, हरि, अभयम् कृष्णा, अभयम्'-
की गुहार लगाई, तब मुझे उसके शील की रक्षा का अवसर मिला।

जैसे ही मुझे पुकारा गया, मैं अविलम्ब पहुँच गया। अब इस स्थिति में मेरी गलती बताओ ?"

उद्धव बोले-
"कान्हा आपका स्पष्टीकरण प्रभावशाली अवश्य है, किन्तु मुझे पूर्ण संतुष्टि नहीं हुई! 
क्या मैं एक और प्रश्न पूछ सकता हूँ ?"

कृष्ण की अनुमति से उद्धव ने पूछा-
"इसका अर्थ यह हुआ कि आप तभी आओगे, जब आपको बुलाया जाएगा ? क्या संकट से घिरे अपने भक्त की मदद करने आप स्वतः नहीं आओगे ?"

कृष्ण मुस्कुराए-
"उद्धव इस सृष्टि में हरेक का जीवन उसके स्वयं के कर्मफल के आधार पर संचालित होता है।

न तो मैं इसे चलाता हूँ, और न ही इसमें कोई हस्तक्षेप करता हूँ।

मैं केवल एक 'साक्षी' हूँ।

मैं सदैव तुम्हारे नजदीक रहकर जो हो रहा है उसे देखता हूँ।

यही ईश्वर का धर्म है।"

"वाह-वाह, बहुत अच्छा कृष्ण! तो इसका अर्थ यह हुआ कि आप हमारे नजदीक खड़े रहकर हमारे सभी दुष्कर्मों का निरीक्षण करते रहेंगे?"

हम पाप पर पाप करते रहेंगे, और आप हमें साक्षी बनकर देखते रहेंगे ?

आप क्या चाहते हैं कि हम भूल करते रहें ? पाप की गठरी बाँधते रहें और उसका फल भुगतते रहें ?" उलाहना देते हुए उद्धव ने पूछा!

तब कृष्ण बोले- "उद्धव, तुम शब्दों के गहरे अर्थ को समझो।"

जब तुम समझकर अनुभव कर लोगे कि मैं तुम्हारे नजदीक साक्षी के रूप में हर पल हूँ, तो क्या तुम कुछ भी गलत या बुरा कर सकोगे ?

तुम निश्चित रूप से कुछ भी बुरा नहीं कर सकोगे।

जब तुम यह भूल जाते हो और यह समझने लगते हो कि मुझसे छुपकर कुछ भी कर सकते हो,
तब ही तुम मुसीबत में फँसते हो!
साभार

।। कृष्णम् वन्दे जगतगुरूम् ।।

बुधवार, 8 दिसंबर 2021

gita

gita
क्या आपके पास भगवद-गीता है ? 
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अगर नहीं है तो जरुर लीजिये, इसमें आपके जीवन से जुडी कई समस्याओं और प्रश्नों का हल है ।
गीता के कुछ महत्वपूर्ण श्लोक जो आपके कई प्रश्नों को सुलझा सकते हैं ?

१. हम चिंता और शोक से कैसे छुटकारा पा सकते हैं ? - भ.गी. 2.22

२. शांति प्राप्त करने के लिए स्थिर मन और अलौकिक बुद्धि कैसे प्राप्त किया जाये ? - भ.गी.2.66

३. भगवान को अर्पित भोजन ही क्यों खाया जाये ? - भ.गी. 3.13

४. अपने निर्धारित कर्तव्यों का पालन करते हुए भक्ति कैसे की जाये ? - भ.गी. 3.43

५. जीवन की पूर्णता को कैसे पाया जाये ? - भ.गी. 4.9

६. धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष को कैसे पाएं ? - भ.गी. 4.11

७. आध्यात्मिक गुरु का आश्रय कैसे लें ? - भ.गी. 4.34

८. क्या एक पापी भी दुखों के सागर को पार सकता है ? - भ.गी. 4.36

९. मनुष्य दुखों के जाल में क्यों फंसा हुआ है ? - भ.गी. 5.22

१०. शान्ति का सूत्र क्या है ? - भ.गी. 5.29

११. मन किसका मित्र है और किसका शत्रु ? - भ.गी. 6.6

१२. क्या मन को नियंत्रित करके शांति प्राप्त की जा सकती है ? - भ.गी. 6.7

१३. चंचल मन को कैसे नियंत्रित करें ? - भ.गी. 6.35

१४. पूर्ण ज्ञान क्या है ? - भ.गी. 7.2

१५. मुक्ति कैसे पाएं ? - भ.गी. 7.7

१६. माया को वश में करने का रहस्य क्या है ? - भ.गी. 7.14

१७. पाप-कर्म क्या हैं ? उन्हें कैसे हटाया जाये ? - भ.गी. 9.2

१८. हमारा परम-लक्ष्य क्या होना चाहिए ? - भ.गी. 9.18

१९. क्या कोई व्यक्ति अपनी इच्छा के ग्रह पर पहुँच सकता है ? - भ.गी. 9.25

२०. क्या भगवान हमारे द्वारा अर्पित भोजन ग्रहण करते हैं ? - भ.गी. 9.26

२१. इस भौतिक संसार में आनंद पाने के माध्यम क्या हैं ? - भ.गी. 9.34

२२. इस मनुष्य जन्म की पूर्णता क्या है ? - भ.गी. 10.10

२३. हमारे हृदयों में संचित मल को कैसे साफ़ किया जाये ? - भ.गी. 10.11

२४. परम पुरुषोत्तम भगवान कौन हैं ? - भ.गी. 10.12-13

२५. भगवान कृष्ण ने अर्जुन को विश्व-रूप क्यों दिखाया ? - भ.गी. 11.1

२६. भगवद-गीता का सार क्या है और हमारे दुखों का कारण क्या है ? - भ.गी. 11.55

२७. रजोगुण एवं तमोगुण पर विजय कैसे प्राप्त करें ? - भ.गी. 14.26

२८. क्या हम भगवान को देख, सुन और उनसे बात कर सकते हैं ? - भ.गी. 15.7

२९. जीव शरीर छोड़ते समय साथ में क्या ले जाता है ? - भ.गी. 15.8

३०. भगवान को कैसे पाया जाये ? - भ.गी. 18.66

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

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बुधवार, 1 दिसंबर 2021

duba

duba
STRUCTURE
जब कोई किसी काम में मगन/लीन/डूबा हुआ होता है तो वैसे वाक्यों को Translate करने के लिए हम दिए हुए Structure का प्रयोग करते हैं।

Example-

मनजीत क्रिकेट खेलने में मगन है।
Manjeet is engrossed in playing cricket.
वह पढ़ने में डूबा है।
He is engrossed in reading.
तुम सोचने में लीन थे।
You were engrossed in thinking.
हम लोग फिल्म देखने में मग्न थें।
We were engrossed in watching a movie.
तो दोस्तों जब भी हमें किसी वाक्य से ऐसा लगे कि उस वाक्य में कोई कर्ता

सोमवार, 29 नवंबर 2021

on the pretext of

on the pretext of
                         Structure

यदि हमें किसी भी हिंदी वाक्य में “कोई काम का बहाना बनाकर" ऐसे शब्दों का समूह मिले तो हम (On the pretext of +V4) का प्रयोग करके वाक्य को अनुवाद (translate) करते हैं।

Sub+(Helping Verb)+Main Verb+(Obj)+on the pretext of+V4+Other Words.

वह पढ़ने का बहाना बनाकर खेल रहा है।
He is playing on the pretext of reading.

तुम स्कूल जाने का बहाना बनाकर बाजार आए हो।
You have come to market on the pretext of going to school.

मैं सोने का बहाना बनाकर तुमसे मिलना चाहता हूं।
I want to meet you on the pretext of sleeping.